एक बार एक राजा शिकार के लिए जंगल में गया. उसने जंगल में अपने धनुष् से एक शेर का शिकार किया . लेकिन तीर लगने के बाद मरने के पहले उस शेर ने दर्द की वजह से तडप तडपकर बहुत दहाडे मारी. लेकिन उसकी वजह से वहां ध्यानस्थ बैठे एक ऋषी की तपस्या भंग हुई और उसने गुस्से के मारे राजा को शाप दिया की तुम्हारी उंचाई 25 फिट हो ताकी किसी भी जानवर का शिकार करने से पहले उसे तुम्हारी आहट हो. गुस्से के मारे ऋषी ने शाप तो दिया लेकिन उसकी वजह से राजा की उंचाई इतनी बढ गई कि उसे कही भी जाना एकदम दुश्वार हो गया. इसलिए राजा ने ऋषी से माफी मांगकर क्षमा याचना की और उसकी उंचाई पहले जैसी करनेके लिए विनती की. राजा के बहुत मनाने के बाद ऋषी का गुस्सा कम होकर राजा को उसने उसकी उंचाई पहले जैसी करने की एक तरकीब बताई. -
'' यहां से आगे 15 किमी जंगल के अंदर एक पागल औरत रहती है ... तूम उसे ढूंढो और उसे ऐसा सवाल पुछो की जिसका जवाब उसने 'नही' ऐसा देना चाहिए...तूम उसे कितने भी सवाल पुछो... उस औरत ने जितनी बार 'नही' कहा उतनी बार तुम्हारी उंचाई 5 फिटसे कम होगी. ''
राजा ने वहांसे आगे 15 किमी जंगल पछाडकर उस पागल औरत को ढूंढा और उस ऋषी के कहे अनुसार उस औरत को अलग अलग सवाल पुछे.
'' तुझे फांसी लगाऊं ?''
'' हां ''
'' तुझे जंगलसे बाहर निकाल दूं ?''
'' हां''
राजा ने उसे न जाने कितने सवाल पुछे लेकिन उसका जवाब 'हां' ही था.
आखिर राजा ने चिढकर उसे सवाल पुछा - '' तूम पागल हो क्या ?''
उसने झटसे जवाब दिया - '' नही''
और क्या आश्चर्य राजाकी उंचाई तुरंत पांच फिटसे घट गई.
राजा की ऊंचाई अब 20 फिट हो गई. 20 फिट उंचाई भी बहुत जादा थी इसलिए राजा ने उसे फिरसे वही सवाल पुछा -
'' तूम पागल हो क्या ?''
उसने फिरसे जवाब दिया '' नही''
राजा की उंचाई फिरसे 5 फिट घट गई और अब राजा 15 फिटका हो गया था. 15 फिट भी अधिक थे इसलिए राजा ने फिर से उस पागल औरत से पुछा - '' तूम पागल हो क्या?''
वह पागल औरत चिढकर बोली, '' तुम्हे कितनी बार बताना पडेगा, नही, नही, नही''
Matlab wo raja pura khatam ho gaya
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